Aartidham
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Navaratri Puja
चैत्र और आश्विन मास की नवरात्रि के 9 दिन प्रातःकाल
प्रत्येक दिन माँ दुर्गा के एक विशेष रूप की पूजा की जाती है। प्रत्येक देवी का अपना विशेष मंत्र, रंग और महत्व है।
माँ शैलपुत्री पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं। इन्हें पार्वती भी कहा जाता है। ये दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल धारण करती हैं।
माँ ब्रह्मचारिणी तपस्या और त्याग की देवी हैं। दाहिने हाथ में जप की माला और बाएं हाथ में कमंडल धारण करती हैं। ये ज्ञान और तपस्या की प्रतीक हैं।
माँ चंद्रघंटा के मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है। ये वीरता और शौर्य की प्रतीक हैं। दस भुजाओं में विभिन्न अस्त्र-शस्त्र धारण करती हैं।
माँ कूष्मांडा ब्रह्मांड की रचना करने वाली देवी हैं। इनकी आभा सूर्य के समान तेजोमय है। आठ भुजाओं में कमंडल, धनुष, बाण आदि धारण करती हैं।
माँ स्कंदमाता भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता हैं। ये सिंह पर विराजमान होती हैं। गोद में बालरूप में कार्तिकेय को धारण करती हैं।
माँ कात्यायनी महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रकट हुई थीं। ये अत्यंत उग्र रूप धारण करने वाली देवी हैं। इन्होंने महिषासुर का वध किया था।
माँ कालरात्रि का रूप अत्यंत भयानक है। काले वर्ण वाली ये देवी सभी प्रकार के भय और बुराइयों का नाश करती हैं। गले में विद्युत माला धारण करती हैं।
माँ महागौरी अत्यंत गोरे वर्ण की हैं। श्वेत वस्त्र धारण करती हैं और वृषभ पर सवार होती हैं। ये शांति और करुणा की प्रतीक हैं।
माँ सिद्धिदात्री सभी प्रकार की सिद्धियां प्रदान करने वाली देवी हैं। कमल पर विराजमान होती हैं और चार भुजाओं में चक्र, गदा, शंख और कमल धारण करती हैं।
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जय माता दी!
नौ दिनों तक पूजा करने से सभी चक्र जागृत होते हैं