भुवन विराजी शारदा, महिमा अपरम्पार। भक्तों के कल्याण को, धरो मात अवतार॥ मैया शारदा तोरे दरबार, आरती नित गाऊँ॥ श्रद्धा को दीया प्रीत की बाती, असुअन तेल चढ़ाऊँ, दर्श तोरे पाऊँ॥ मैया शारदा तोरे दरबार...॥ मन की माला आँख के मोती, भाव के फूल चढ़ाऊँ, दर्श तोरे पाऊँ॥ मैया शारदा तोरे दरबार...॥ बल को भोग स्वांस दिन राती, कंधे से विनय सुनाऊँ, दर्श तोरे पाऊँ॥ मैया शारदा तोरे दरबार...॥ तप को हार कर्ण को टीका, ध्यान की ध्वजा चढ़ाऊँ, दर्श तोरे पाऊँ॥ मैया शारदा तोरे दरबार...॥ माँ के भजन साधु सन्तन को, आरती रोज सुनाऊ, दर्श तोरे पाऊँ॥ मैया शारदा तोरे दरबार...॥ सुमर-सुमर माँ के जस गावे, चरनन शीश नवाऊँ, दर्श तोरे पाऊँ॥ मैया शारदा तोरे दरबार, आरती नित गाऊँ॥
॥ इति ॥
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