जय सन्तोषी माता, मैया जय सन्तोषी माता। अपने सेवक जन के, सुख सम्पत्ति दाता॥ सुन्दर चीर सुनहरी, माँ धारण कीन्ही। हीरा पन्ना दमके, तन श्रृंगार लीन्ही॥ माँ सन्तोषी की महिमा, नित बढ़ती जाए। भक्तन की बिगड़ी बाते, सुधरती जाए॥ हर शुक्रवार पूजे, भक्त व्रत रखें। माँ कष्ट मिटा देती, सुख-समृद्धि दे॥ जय सन्तोषी माता, मैया जय सन्तोषी माता। भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥
॥ इति ॥
दीप जलाने के लिए स्पर्श करें



