ॐ त्र्यम्बकं यजामहे, सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्, मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥ (१०८ बार जप करें) ॥ अर्थ ॥ हम त्रिनेत्रधारी भगवान शिव की आराधना करते हैं, जो सुगन्धित और पोषण करने वाले हैं। जैसे ककड़ी अपनी बेल से मुक्त होती है, वैसे ही हमें मृत्यु के बंधन से मुक्त कर अमरत्व प्रदान करें। ॐ नमः शिवाय॥
॥ इति ॥
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