यशोमती मैया से बोले नंदलाला। राधा क्यों गोरी, मैं क्यों काला॥ बोली मुस्काती मैया, सुन मेरे प्यारे। कौन कहे काले हैं, नैना ये तारे॥ तू है सांवली सूरत वाला॥ रात गोरी, दिन काला, अरे सुन तू ग्वाला। मन गोरा भावे, ना तन का उजाला॥ प्यार तो होता है भोला-भाला॥ यशोमती मैया से बोले नंदलाला। राधा क्यों गोरी, मैं क्यों काला॥
॥ इति ॥
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