यशोमती मैया से बोले नंदलाला। राधा क्यों गोरी, मैं क्यों काला॥ बोली मुस्काती मैया, सुन मेरे प्यारे। कौन कहे काले हैं, नैना ये तारे॥ तू है सांवली सूरत वाला॥ यशोमती मैया से बोले नंदलाला। राधा क्यों गोरी, मैं क्यों काला॥ रात गोरी, दिन काला, अरे सुन तू ग्वाला। मन गोरा भावे, ना तन का उजाला॥ प्यार तो होता है भोला-भाला॥ यशोमती मैया से बोले नंदलाला। राधा क्यों गोरी, मैं क्यों काला॥ बोली हंसकर मैया, सुन री मेरी बात। गोरे रंग से सब जग में, है प्रेम की बरसात॥ काला रंग है मोहन प्यारा॥ यशोमती मैया से बोले नंदलाला। राधा क्यों गोरी, मैं क्यों काला॥ मैं तो मोहन से प्यार करूं, सांवरे मेरे लाल। गोरी राधा श्याम संग, रचता रंग रसाल॥ यही है सृष्टि का खेल निराला॥ यशोमती मैया से बोले नंदलाला। राधा क्यों गोरी, मैं क्यों काला॥
॥ इति ॥
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