॥ हनुमान बाहुक ॥ बाहुकं तव देहेऽस्मिन्, वायु पुत्र नमोऽस्तु ते। कष्टभेदे त्वमेकः स्याः, हनुमान जय मारुते॥ नमामि त्वां महावीरं, बाहुभिः प्रतिभाषिणम्। बाहुकं मे प्रसीदत्वं, श्री हनुमत्प्रभो॥ जय हनुमान जय हनुमान, जय केसरी नंदन। जय अंजनी पुत्र, जय पवन सुत प्रबल बलदायक॥ तुम्हारी बाहुओं में असीम शक्ति, दुःख हरे सब जन। हनुमान जी की बाहुक, संकट काटे सब जग॥
॥ इति ॥
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