॥ श्री गंगा स्तोत्र ॥ नमामि गंगे त्वां भगवति, विष्णुपदप्रभाविनीम्। पातितोद्धारिणीं देवि, भक्तिमान् वा प्रपाहि माम्॥ त्रिपुरासुर भगवति, भ्रह्मा विष्णु शिवात्मिके। जगदम्बे सदा गंगे, पापनाशिनि माम् भज॥ गंगे त्वं जगदम्बे त्वं, शिवे त्वं विष्णुप्रिये। पापनाशिनि मां पाहि, सदा नमोऽस्तु ते॥ जय जय जय जय गंगे, जय जय जय जय गंगे। माता त्वं मे पापनाशे, कृपा करहु जगदम्बे॥
॥ इति ॥
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